Sunday, 27 May 2012
Tuesday, 22 May 2012
खामोश थी मैं
खामोश हूँ मैं
कभी न पूछा किसी ने मेरी ख़ामोशी का राज
न जान सका कोई मेरी ख़ामोशी का राज
ये खामोशियाँ यूँही बढ़ रही थी
दूरियां यूँही बढ़ रही थी
एक बार तो खामोशियों को दूर करने की कोशिश की थी मैंने
लेकिन तुम्हारी ख़ामोशी ने रोक लिया मुझे
न तुमने पूछा
न मैंने पूछा
कोई न समझ सका मेरी ख़ामोशी
कभी तो ख़त्म करनी होंगी ये खामोशियाँ
तुम नहीं हारोगे
मैं नहीं हारुंगी
हारेंगी ये खामोशियाँ
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