Wednesday, 6 July 2011


Alone Again


I saw him on the street
It stopped my feet

I started running towards him
Filled with sheer happiness
Ignored the world around me
Just to meet him

Everything around is blur
Except the presence of him
But he is getting out of my sight

I ran hard for him

I called him to stop

No you cannot do this to me
But there is no one to reply

I started walking down my memory lane
Throttling the feelings of pain

Sunday, 5 June 2011

तुम क्यूँ चली गयी 

जुल्फों के बादल में चेहरे को छुपाकर
नजरो को मेरी नजरो से चुराकर
तुम क्यूँ चली गयी मुझसे शरमाकर

मैं तो चाहता था तुम्हारी एक नजर अपनी चेहरे पर
पर नजरो को तुमने फेर लिया अपनी आँखों को झुकाकर
तुम क्यूँ चली गयी मुझसे शरमाकर

एक बार तो मुझे प्यार से देखो अपनी नजरे उठाकर
तब तुम ख़ुशी महसूस करोगी अपनी परछाई को मेरी नजरो में पाकर
लेकिन तुम क्यूँ चली गयी मुझसे शरमाकर

मैं तो खुश था तुम्हे अपनी बाँहों में पाकर
लेकिन तुम तो चली गयी मुझसे शरमाकर
 

Wednesday, 25 May 2011


मुट्ठी भर खुशियाँ

आज कल पाँव जमी पर नहीं पड़ते मेरे
खुशियाँ फैली है फ़िजाओ में शाम सवेरे

जी करता है कैद कर लू मुट्ठी में इन खुशियों को
न खोलू अपनी खुशियों भरी मुट्ठी को

पंछी की तरह उड़  जाएगी खुशियाँ सवेरे
न कैद कर पाओगे इन खुशियों को
खुशियाँ तो बनी है शाम को आने को
और सुबह में पंछी की तरह उड़ जाने को